अब पहाड़ी क्षेत्रों में एक इंजन से चलेंगी ट्रेनें

वाराणसी। रेलवे बोर्ड के सदस्य यांत्रिक अरुणेंद्र कुमार ने शनिवार को डीरेका का निरीक्षण किया। उन्होंने आधुनिक तकनीक वाले हाई हार्सपावर (उच्च अश्वशक्ति) के इंजन बनाने पर जोर दिया। कम हार्सपावर के डीजल इंजन का निर्माण बंद करने की बात कही। कहा कि रेलवे पर यात्रियों का दबाव लगातार बढ़ रहा है जिससे सभी ट्रेनों में बोगियों की संख्या बढ़ाना जरूरी हो गया है। पहाड़ी क्षेत्रों में ट्रेनों को चलाने के लिए 3100 हार्स पावर के दो इंजन लगते हैं। इससे डीजल की अधिक खपत होती है और मानव श्रम भी अधिक लगता है। अब हाल ही में डीरेका में तैयार किए उच्च तकनीक के 4500 हार्स पावर के एक डीजल इंजन से ही पहाड़ी क्षेत्र में ट्रेनें चल सकेंगी।

उन्होंने डीरेका में तैयार 5500 हार्स पावर का डीजल इंजन भी देखा जिसका परीक्षण होना है। इस इंजन का इस्तेमाल माल ढुलाई में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इंजनों के निर्माण में प्रोत्साहन में कोई कमी नहीं आएगी। उच्च तकनीक वाले इंजन से 100 बोगियों की मालगाड़ियां दोगुनी स्पीड से चलाई जा सकती हैं। वर्तमान में 3100 हार्सपावर के इंजन से 58 बोगियों की मालगाड़ियां चल रही हैं। इसकी रफ्तार 30 से 35 किमी प्रति घंटा है। इसके अलावा अधिक भार क्षमता वाले वैगन भी बनाए जा रहे हैं। यांत्रिक सदस्य ने डीरेका न्यू ब्लाक शॉप में हॉरिजल बोरिंग मशीन के साथ ही आटोमेटिक टूल चेंजर मशीन का उद्घाटन किया। उन्होंने डीरेका के मुख्य यांत्रिक इंजीनियर राकेश बताश, भंडार नियंत्रक एसपी पिपलानी से इंजनों के निर्माण के बारे में विचार विमर्श किया और सुझाव भी दिए। इसके बाद कर्मचारी परिषद के संयुक्त सचिव अमर सिंह, सदस्य के अलावा विभिन्न कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारियों ने उनको ज्ञापन सौंपा। कर्मचारी नेताओं ने कपूरथला की तरह डीरेका में ग्रुप इनसेंटिव स्कीम लागू करने की मांग की। साथ ही भूलनपुर रेलवे स्टेशन का नाम डीएलडब्ल्यू रेलवे स्टेशन रखने, इस स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव की मांग की। यांत्रिक सदस्य ने कांफ्रेंस हाल में रेल इंजनों की डिजाइनों में सुधार एवं आधुनिकीकरण से संबंधित डिजाइन का अवलोकन किया।

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