इस वजह से फंस गई हथुआ-भटनी रेललाइन परियोजना, ऊहापोह में जिला प्रशासन

गोरखपुर – पूर्व रेलमंत्री लाल प्रसाद यादव का ड्रीम प्रोजेक्ट हथुआ-भटनी रेललाइन परियोजना भूमि अधिग्रहण कानून की पेंचीदगी में फंस गया है। किसानों की नजर जिला प्रशासन की तरफ से उठाए जाने वाले कदम पर टिकी है। किसानों की मानें तो 2013 के नए भूमि अर्जन कानून के मुताबिक अभिलेखीय कब्जा के पांच वर्ष के भीतर भूमि पर भौतिक कब्जा व मुआवजा तय करना चाहिए था लेकिन प्रशासन ने ऐसा नहीं किया। ऐसी स्थिति में परियोजना की कार्यवाहियां व्यपगत (लैप्स) हो गई हैं।

परियोजना एक नजर में

2005-06 में स्वीकृत हुई। भूमि अधिग्रहण कानून 1894 के अनुसार भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू हुई। चार अगस्त 2009 को धारा 4(1) की अधिसूचना, 22 अगस्त 2009 को गजट का प्रकाशन, सात सितंबर 2009 को दो समाचार पत्रों में प्रकाशन किया गया। 24 सितंबर 2009 को धारा 4 (1) व 22 दिसंबर 2010 को धारा 6(1) की सार्वजनिक सूचना हुई। धारा नौ के अंतर्गत 18 जनवरी 2011 से 24 जनवरी 2011 तक सुनवाई की गई। 20 दिसंबर 2012 को जिला प्रशासन ने अभिलेखीय कब्जा दे दिया।

क्या कहता है नया कानून

भूमि अर्जन कानून 2013 की धारा 24(1) के मुताबिक भूमि अर्जन अधिनियम 1894 के अधीन यदि भूमि अर्जन की कार्यवाहियां शुरू की गई है व धारा 11 के अधीन अधिनिर्णय इस अधिनियम के प्रारंभ के पांच वर्ष या उससे अधिक वर्ष पूर्व किया गया है, कितु भूमि का भौतिक कब्जा नहीं लिया गया है या प्रतिकर मुआवजा का संदाय नहीं किया गया है। वहां उक्त कार्यवाहियों के बारे में यह समझा जाएगा कि वे लैप्स हो गई हैं। यदि सरकार चाहे तो इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार ऐसी भूमि अर्जन की कार्यवाहियां नए सिरे से शुरू करेंगी।

शासन से मांगा मार्गदर्शन

देवरिया के उप भूमि अधिकारी सतीश कुमार का कहना है कि सभी कार्यवाही दो वर्ष में पूरे किए जाने चाहिए थे लेकिन कार्यवाही 10 वर्ष बाद भी पूरे नहीं हो पाए। इसलिए शासन से मार्गदर्शन मांगा गया है।

Facebooktwittergoogle_plusredditpinterestlinkedinmail