जबलपुर-गोंदिया ब्रॉडगेज प्रोजेक्ट को पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी

जबलपुर: जबलपुर-गोंदिया ब्रॉडगेज परियोजना में केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की अनापत्ति की बाधा को दूर करने के लिए शीघ्र ही मंत्रालय से इस संबंध में सम्पूर्ण रिपोर्ट बुलाकर इस परियोजना को मंजूरी हेतु कोई न कोई रास्ता निकालने का प्रयास किया जायेगा. यह आश्वासन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सांसद राकेश सिंह को उस वक्त दिया जब आज सांसद श्री सिंह ने प्रधानमंत्री से दिल्ली में उनके निवास पर भेंट कर उनको इस परियोजना में आ रही अड़चनों से अवगत कराते हुए उन्हें दूर करने सीधे हस्तक्षेप करने का आग्रह किया.

2006 में पूरा होना था प्रोजेक्ट

सांसद श्री सिंह ने इस दौरान प्रधानमंत्री को सौंपे पत्र में अवगत कराया कि मध्यप्रदेश देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जिसके कुल क्षेत्रफल में 30 प्रतिशत हिस्सा वनों का आता है जो कि हमारी ताकत है लेकिन अब इसे  केन्द्र हमारे क्षेत्रीय विकास के मामले में कमजोरी बना रहा है. पत्र में सांसद ने उल्लेख किया है कि मेरे संसदीय क्षेत्र जबलपुर के अंतर्गत जबलपुर-गोंदिया बाड़ौडगेज परियोजना जो कि सम्पूर्ण महाकौशल क्षेत्र जिसमें लगभग 64 प्रतिशत आदिवासी जनसंख्या है के विकास को दृष्टिगत रखते हुए लगातार 40 वर्षों से की जा रही  क्षेत्रीय जनता की मांग पर वर्ष 2000 में स्वीकृत की गयी थी जिसकी लागत 511 करोड़ रू0 थी और इसे लगभग 6 वर्षों में पूर्ण हो जाना था.

दक्षिण भारत की दूरी 273 किमी कम होगी

उन्होंने पीएम को अवगत कराया कि इस परियोजना के पूर्ण हो जाने से पूर्व से दक्षिण भारत की दूरी 273 किमी कम होगी साथ ही रेलवे को एक नया ट्रेक मिलेगा साथ ही विकास का नया मार्ग इस अंचल में प्रशस्त होगा. 285 किमी की इस रेल परियोजना के मात्र 77 किमी हिस्से में कान्हा नेशनल फारेस्ट का कुछ हिस्सा आता है जिसके आधार पर केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने अनापत्ति न देकर इस परियोजना के कार्य पर रोक लगा दी है.

प्रोजेक्ट का रुकना राष्ट्रीय क्षति

सांसद श्री सिंह ने प्रधानमंत्री को अवगत कराया कि जब इस परियोजना का लगभग 60 प्रतिशत से अधिक कार्य हो चुका है और इस पर लगभग 650 करोड़ रू0 खर्च किये जा चुके हैं ऐसे में यदि इस परियोजना को रोका गया तो यह बहुत बड़ी राष्ट्रीय क्षति होगी. सांसद श्री सिंह ने परियोजना प्रारंभ होने के 13 वर्ष बाद वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की आपत्ति पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि यदि ऐसा कुछ था तो परियोजना प्रारंभ होने के पूर्व या प्रारंभ के वर्षों में मंत्रालयों द्वारा ध्यान क्यों नहीं दिया गया.

100 वर्षों से चल रही नेरोगेज ट्रेन

उन्होंने इस बात से भी पत्र में अवगत कराया कि जिस मार्ग पर वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को आपत्ति है उस ट्रेक पर लगभग 100 वर्षों से नेरोगेज ट्रेन का संचालन हो रहा है और मेरी जानकारी के अनुसार रेल मंत्रालय इस बात के लिए भी तैयार है कि वह वन्य जीवों की सुरक्षा हेतु संबंधित क्षेत्र में ट्रेनों की गति को भी नियंत्रित करेगा.

प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह ने सांसद श्री सिंह को आश्वस्त किया कि चूंकि इस परियोजना पर 650 करोड़ रू0 की इतनी बड़ी राशि खर्च हो चुकी है इसलिए शीघ्र ही संबंधित मंत्रालयों से पूरी रिपोर्ट बुलाकर वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की अनापत्ति का रास्ता निकाल लिया जायेगा.

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