नहीं बदल सकता रेलवे लाइन का रूट: डीएफसीसीआईएल

Darbhanga Jn (DBG) दरभंगा:  ईस्टर्न डेडीकेटेड फ्रेट कोरीडोर रेल परियोजना हेतु जिले में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जिला भू-अर्जन कार्यालय में चल रही है। इस बीच डीएफसीसी एक वरीय पदाधिकारी ने पत्र भेज कर यह स्पष्ट किया है कि इस परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के लिए किए जा चुके सर्वे के बाद तय किया गया रूट नहीं बदला जा सकता है। ऐसे में जिले की हजारों एकड़ कृषि योग्य भूमि, बने मकान के जाने की बारी है।

डीएफसीसीआईएल के एक अधिकारी द्वारा जारी पत्र में कहा है कि उक्त परियोजना के लिए रेलवे लाइन बिछाने के लिए जो रूट तय किया गया है उसके पहले भूमि को अच्छी तरह से सर्वे एक सक्षम एजेंसी ‘राइट्स’ द्वारा किया गया था। इसमें सारे विकल्प तलाश लिए गए थे तब जाकर रूट को मंजूरी मिली है। ऐसे में रूट को नहीं बदला जा सकता है। अधिकारी की माने में रूट बदला जाना न तो तकनीकी रूप से और न ही आर्थिक दृष्टिकोण से सही होगा।

पत्र में इस बात का उल्लेख किया गया है कि हावड़ा-नई दिल्ली ग्रैंडकार्ड रेलवे लाइन का निर्माण आज से करीब डेढ़ सौ साल पहले हुआ था। आगे कहा कि इस रूट पर डीएफसी का एलाइनमेंट वर्तमान रेलवे लाइन के उत्तर दिशा में है। धनबाद-मुगलसराय रेलखंड के बीच वर्तमान रेलवे लाइन के दोनों हिस्से उत्तर एवं दक्षिण में मानपुर-काष्ठा के बीच गया एक बड़ी आबादी वाला शहर है। जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।

बता दें कि उक्त परियोजना के तहत रेलवे लाइन बिछ जाने से जिले के मानपुर, गेरे, कंडी, छोटकी नवादा, गोविंदपुर, खरखुरा, कुजापी, दूर्वे आदि सहित कई गांवों के बहुफसली जमीन के भूधारी बेरोजगार हो जाएंगे। वहीं इस परियोजना के दायरे में जमीन पर बने मकानों में रहने वाले हजारों परिवार बेघर हो जाएंगे।

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