बंद हो चुके धनबाद-झरिया रेल मार्ग के दोनाें ओर अतिक्रमणकारियों का कब्जा

धनबाद – कभी धनबाद से झरिया होते हुए पाथरडीह तक जाने वाले रेलमार्ग में रेल तो चला करते थे लेकिन रेलवे की जमीन भी खाली रहती थी क्योंकि समय-समय पर रेलवे के द्वारा अभियान चलाया जाता था। लेकिन जब से यह रेलमार्ग बंद हुआ है तब से लेकर अब-तक एक नहीं बल्कि दर्जनों लोगों ने रेलवे की जमीन का अतिक्रमण करके पक्का मकान बना लिया है तो कुछ ने व्यवसाय खोल लिया है। एक व्यक्ति जिसे रेलवे ने वर्ष 1945 में जमीन लीज पर दिया था उसने मामला कोर्ट तक पहुंचा दिया है ताकि जमीन खाली ना करना पड़े। साथ ही खेती के लिए मिले जमीन पर बड़े-बड़े जेनरेटर बैठाकर व्यवसाय फैला लिया है। रेलवे की ओर से उसे हटाने का कई बार प्रयास किया गया लेकिन वह सफल नहीं हो सका। वहीं अन्य अतिक्रमणकारी भी धीरे-धीरे रेलवे की जमीन पर कब्जा करते रहे। यहां तक कि नगर निगम का पानी भी वहां सप्लाई होने लगा है। रेलमार्ग बंद होने के बाद जिला प्रशासन ने इस पर सड़क बनाने की पहल किया था जो आज भी अधर में लटका हुआ है। फिलहाल स्थिति यह है कि बंद रेल लाईन के दोनों ओर कब्जाधारियों की संख्या बढ़ते जा रही है।

धनबाद से लेकर धनसार तक हो चुका है अतिक्रमण

इस बंद रेल मार्ग पर धनबाद से लेकर धनसार तक अतिक्रमण हो चुका है। दोनों ओर कई पक्के और कच्चे मकान बन चुके हैं। कई ने वहां अपना स्थायी व्यवसाय खोल लिया है। वहीं कुछ लोग रेलवे की जमीन काे बेच भी रहे हैं। जिसे देखने के लिए कोई जिम्मेवार नहीं पहुंचता है। झुग्गी-झोपड़ी की संख्या सबसे ज्यादा है। इसमें कई संदिग्ध लोग भी रह रहे है। कहीं-कहीं पर खटाल खोल लिया गया है। लोग कहते है कि वे यहां वर्षों से रह रहे है तो खाली कैसे करेंगे।

खेती के लिए जमीन ली, अब खाली नहीं कर रहे हैं

धनबाद-झरिया रेल मार्ग पर ही रेलवे से वर्ष 1942 में लीज पर एक व्यक्ति ने जमीन लिया था। अब जब रेलवे उसे खाली कराने के लिए जाती है तो वह खाली नहीं करते है। रेलवे को इसके लिए हाई कोर्ट तक जाना पड़ गया है। रेलवे कहती है कि यह जमीन उसका है। वहीं लीज धारक का कहना है कि जमीन हमलोगों का है। वहीं जिस जमीन को खेती के लिए लिया गया उस पर अब दूसरा व्यवसाय भी चल रहा है।

धनसार से आगे भी हो रहा है अतिक्रमण 

इस रेलखंड पर अब धनसार से आगे भी अतिक्रमण शुरू हो चुका है। चूंकि रेलवे का इस रेलखंड से ध्यान हट चुका है और शायद ही वह कभी इसे देखने के लिए कोई अधिकारी आते हो। इसी वजह से अब अतिक्रमण अब धनसार से आगे बढ़ते हुए झरिया की ओर बढ़ने लगा है। रेलवे यदि इसी तरह से चुप रही तो आने वाले समय में पूरी जमीन पर कब्जा हो जाएगा। एक ओर रेलवे कुछ जगहों पर अतिक्रमण हटाने के लिए कठोर कार्रवाई के आदेश दे रही है वहीं इस जगह पर रेलवे चुप्पी साधे हुए है।

इस बारे में रेलवे के कनीय अधिकारी ने बताया कि यह सही है कि रेलवे की जमीन पर कब्जा हो रहा है। जहां तक लीज का मामला है तो उसमें रेल सिर्फ 35 वर्ष के लिए देती है। जिस व्यक्ति ने दावा किया है उसका दावा गलत है।

Facebooktwittergoogle_plusredditpinterestlinkedinmail