भारतीय रेल 2030 तक हो जायेगी कार्बन उत्सर्जन ओर कार्बन फुटप्रिंटों से मुक्त एवं इस मिशन को शत प्रतिशत सफल बनाने में WR का अहम योगदान

Indian Railways to become Net Zero Carbon Emitter by the year 2030 – Western Railway’s contribution to reduce the Carbon Footprints and make this mission a 100% success

नई दिल्ली – माननीय रेल, कोयला, वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों के मंत्री श्री पीयूष गोयल ने नई दिल्ली में आयोजित रेल सम्पर्क 2018 सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कहा कि 100% विद्युतीकरण हेतु चल रही वर्तमान कार्य योजना के रेन्यूवेल स्ट्रेटेजीज के साथ जुड़ाव के फलस्वरूप भारतीय रेल वर्ष 2030 तक शून्य कार्बन उत्सर्जक बन जायेगी। भारतीय रेल में आधुनिकीकरण एवं बदलावों के मानदंडों के बारे में जानकारी देते हुए श्री गोयल ने कहा कि यह एक ऐसी टीम है जिसे सदैव भागीदारी के साथ एक सामूहिक लक्ष्य की प्राप्ति हेतु एकत्रित रूप से कार्य करने की आवश्यकता है।

पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी श्री रविंद्र भाकर द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, माननीय रेल मंत्री के इसी मिशन को आगे ले जाते हुए पश्चिम रेलवे ने पर्यावरण के संरक्षण की ओर जागरूकता लाने के उद्देश्य से कार्बन फुटप्रिंटों में कमी लाने हेतु विभिन्न प्रकार के उपाय किये हैं। इसी दिशा में उठाये गये एक महत्त्वपूर्ण कदम के रूप में पश्चिम रेलवे ने अपने सभी छः मंडलों के 726 विद्युतीकृत स्टेशनों पर परंपरागत लाइटों के स्थान पर 100% एलईडी लाइटें लगाई हैं। एक अन्य आदर्श पहल के रूप में मुंबई सेंट्रल स्टेशन पर प्राकृतिक सनलाइट ट्यूब / पाइपें लगाई गई हैं। ये सनलाइट ट्यूब / पाइपें दिन के दौरान प्राकृतिक एवं प्रभावशाली प्रकाश व्यवस्था उपलब्ध कराती हैं तथा विजुअल कम्फर्ट को बढ़ाने के साथ ही विद्युत ऊर्जा की भी बचत करती है। विभिन्न लोकेशनों पर 3.3 मेगा वॉट पावर क्षमता के सोलर प्लांट गये है जिससे 4.3 मिलियन यूनिट वार्षिक बिजली उत्पादन होता है, जिसके फलस्वरूप कार्बन उत्सर्जन में प्रतिदिन 1.4 टन की कमी होती है, इस प्रकार ग्लोबल वॉर्मिंग को कम करने में सहायता मिलती है।

Photo Caption: The first photograph depicts the water recycling plant at Diesel Loco Shed at Vatwa while the secong photo depicts the concourse hall at Mumbai Central station illuminated by the natural sunlight tubes. The third photograph is of the trial run of Ro – Ro service being conducted while the last pic depicts the biodegradable bagasse based packaging used for food in Rajdhani trains.

मुंबई सेंट्रल में एक बायो गैस संयंत्र स्थापित किया गया है, जो ऑर्गेनिक कूड़ों को गैस में परिवर्तित करेगा, जिसका उपयोग भोजन पकाने के लिए किया जायेगा। पश्चिम रेलवे ने एचओजी (हैड ऑन जेनेरेशन)प्रणाली पर कार्य करना प्रारम्भ किया है जिसमें ओवर हैड सप्लाई को लोकोमोटिव के माध्यम से परिवर्तित कर रैक के सम्पूर्ण विद्युत लोड की आवश्यकता की पूर्ति की जाती है। वर्तमान में पश्चिम रेलवे की राजधानी, शताब्दी तथा दुरंतो एक्सप्रेस ट्रेनों में एचओजी पावर सप्लाई कार्यरत है। उपरोक्त के अतिरिक्त गुजरात मेल, कर्णावती एक्सप्रेस तथा गुजरात सम्पर्क क्रांति एक्सप्रेस ट्रेनों 5 रेक को भी एचओजी प्रणाली पर कार्य करने हेतु संशोधित किया गया है। एचओजी प्रणाली लगाने के फलस्वरूप पश्चिम रेलवे ने एचओजी ऑपरेशन के विभिन्न लाभों के अतिरिक्त वर्ष 2017-18 के दौरान 3016 के एलएचएसडी ऑयल (जीवाश्म ईंधन) खपत सहित लगभग 18.85 करोड़ रु.की सकल बचत की प्राप्ति कर सकी है। इसके अलावा पश्चिम रेलवे ने रोहा एवं करमबेली गुड्स शेड के बीच रो-रो सेवा का भी सफल परीक्षण किया है। इसकी वाणिज्यिक सेवा के रूप में शुरूआत होने से न केवल यातायात के संकुचन से बचा जा सकेगा बल्कि इससे ट्रकों के यात्रा समय में भी कमी आयेगी। अतः इससे बहुमूल्य ईंधन की बचत, प्रदूषण में कमी एवं हरित वातावरण की ओर एक नया अध्याय प्रारम्भ होगा।

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर स्वच्छ एवं हरित बनाने की दिशा में ‘प्लास्टिक को ना कहने की प्रतिबद्धता’ का पालन किया जा रहा है। इसी क्रम में पश्चिम रेलवे की सभी तीन राजधानी एक्सप्रेस में प्रयोगात्मक आधार पर पर्यावरण अनुकूल एवं बायो-डिग्रेबल बैगेज में भोजन पैक कर परोसा जा रहा है। इस्तेमाल किये गये पैकेजिंग को कम्पोस्टिंग के जरिये डिस्पोज किया जायेगा जिससे पर्यावरण संपोषणीयता सुनिश्चित की जा सकेगी। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर ग्रीन इंडिया की ओर उठाये गये एक अन्य कदम के रूप में पश्चिम रेलवे की महिला कल्याण संगठन द्वारा नो प्लास्टिक अभियान को प्रोत्साहित करने हेतु रेलकर्मियों को इको प्रें€डली बैग वितरित किये गये। सीएसआर गतिविधि के अंतर्गत वडोदरा स्टेशन पर इको प्रें€डली नम्मा मोडयूलर शौचालय तथा बोतल क्रशिंग मशीन का भी उद्घाटन किया गया।

जल संरक्षण की दिशा में उठाये गये एक कदम के रूप में, वटवा स्थित डीजल लोको शेड में एक रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली स्थापित की गई है। वर्षा जल एकत्रित करने हेतु इस संयंत्र का क्षेत्रफल लगभग 3665 वर्ग मीटर है तथा इसके माध्यम से केवल इसी वर्ष में ही 20 लाख लीटर जल बचाने एवं एकत्रित किये जाने की संभावना है।

Piyush Goyal, Hon’ble of Minister of Railways, Coal, Finance and Corporate Affairs addressed the Rail Contact 2018 conference held in New Delhi and stated that with the current action plans on anvil for 100% electrification coupled with renewable strategies, Indian Railways will become a net zero carbon emitter by 2030. Sharing the scale of modernization and transformation in Indian Railways, Goyal said that it is always a team which needs to work in partnership, with a collective effort of working towards a common goal.

According to a press release issued by Ravinder Bhakar- Chief Public Relations Officer of Western Railway, taking this vision of the Hon’ble Minister of Railways forward, W.Rly has introduced various initiatives to reduce the carbon footprints for generating awareness towards conserving and safeguarding environment. One such major step has been to convert all its conventional light fittings to 100% LED lightings at 726 of its electrified stations over the six divisions of Western Rly. In yet another novel initiative, natural sunlight tubes/sun pipes have been installed at Mumbai Central station. These sunlight tubes/pipes provide natural effective lighting during the day and maximizes visual comfort as well as reduces the use of electricity. Solar plants of 3.3 MWp have been provided at various locations which will result in an annual generation of 4.3 million units of electricity. This will help in cutting down the carbon emissions by 1.4 ton per day, thus contributing in reducing global warming. A bio-gas plant has been set up at Mumbai Central which will convert organic waste into gas which will be used for cooking. W. Rly has started switching over to ‘Head On Generation (HOG) system’ in which overhead power supply is converted through locomotive to meet entire electricity load requirements of the rake. At present, 9 rakes of Rajdhani, Shatabdi & Duronto Express trains of W.Rly are functioning on HOG power supply. In addition to above, 5 rakes of Gujarat Mail, Karnavati Exp & Gujarat Sampark Kranti have also been modified to work on HOG system. As a result of switching over to HOG system, W. Rly has achieved an approximate net saving of Rs.18.85 crores alongwith saving of 3016 KL in HSD oil (fossil fuel) consumption during the year 2017-18, besides various other benefits of HOG operation. Furthermore, W. Rly has also successfully conducted a Ro-Ro service trial between Roha and Karambeli Goods Shed. With the commencement of the commercial run, this will not only help in reducing severe traffic congestion in Thane area but will also help in reducing journey time for trucks, thereby, saving valuable fuel, reduce pollution and head towards a greener environment.

Yet another step that was undertaken on World Environment day is the resolution to say “No to Plastics” for a cleaner and greener India. In this direction, trials of providing food in environment friendly & biodegradable bagasse based packaging have been started in all the three Rajdhani trains of W. Rly. The used packaging will then be processed for disposal through composting to ensure environmental sustainability. Also, the Western Railway Women’s Welfare Organisation (WRWWO) distributed eco friendly bags to the employees of WR to promote the NO Plastic campaign. Under the CSR activity eco friendly Namma modular toilets and Bottle crushing machine were also inaugurated at Vadodara station. In a step towards conservation of water, a rainwater harvesting system has been installed at the Diesel Loco Shed at Vatwa, Gujarat.  This plant has an approximate area of 3665 sq m. to collect rainwater and is expected to save and collect 20 lakh liters of water this year alone.

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