मशीन गायब, हाथ से ट्रेनों की सफाई

d175324-largePatna Jn (PNBE) पटना: ठेका तो मेकेनाइज्ड यानी मशीन से सफाई का दिया गया लेकिन आज भी ट्रेनों की सफाई पुराने र्ढे पर पाइप और हाथ से ही की जा रही है। कर्मचारी जब रेल कोच की सफाई के लिए बेहतर केमिकल की जगह धुलाई के घटिया पाउडर के इस्तेमाल की शिकायत करते हैं तो कोचिंग कांप्लेक्स के अधिकारी उनके ही खिलाफ कार्रवाई करने की धमकी देते हैं। 1दानापुर मंडल प्रबंधन की ओर से ट्रेनों की साफ-सफाई की मेकेनाइज्ड व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। मैन्यूअल सफाई के लिए 100 रुपये प्रति कोच खर्च किया जा रहा था। जबकि, मेकेनाइज्ड सफाई के नाम पर प्रति कोच 550 रुपये तक खर्च किए जा रहे हैं। 1राजेंद्र नगर कोचिंग कांप्लेक्स में होती है 20 ट्रेनों की सफाई: राजेन्द्र नगर कोचिंग कांप्लेक्स में राजधानी एक्सप्रेस, संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस, कुर्ला एक्सप्रेस, लोकमान्य टर्मिनल सुपरफास्ट, कोटा एक्सप्रेस, अर्चना एक्सप्रेस, जियारत एक्सप्रेस, जन साधारण एक्सप्रेस, बांका एक्सप्रेस, हावड़ा व रांची जन शताब्दी एक्सप्रेस समेत 20 ट्रेनों की सफाई व रखरखाव का कार्य होता है। रेल प्रबंधन की ओर से दस नियमित व पांच साप्ताहिक ट्रेनों के रखरखाव के लिए सात करोड़ रुपये में निजी कंपनी को ठेका दिया गया था। ठेके में शर्त यह रखी गई थी कि ट्रेनों की धुलाई का काम मशीन से किया जाएगा। परंतु किसी भी शर्त का अनुपालन नहीं हो रहा है। ट्रेनों की सफाई के लिए न तो जेट मशीन का उपयोग हो रहा है और न ही बाडी की सफाई के लिए स्क्रबर मशीन का उपयोग हो रहा है। कोच पर पाइप से केवल पानी डालकर घटिया धुलाई पाउडर से उसकी सफाई की जा रही है। सफाई के लिए लाइजोल, हार्पिक, मोकलीन, स्क्वीज ब्रश, स्पांज डस्टर, सफाई किट बैग, डिस्पोजेबुल बैग का उपयोग करना है जो नहीं हो रहा है। इसके बदले घटिया कंपनी का केमिकल उपयोग में लाया जा रहा है। शीशे की सफाई के लिए कोलिन तथा शौचालय के लिए लिक्विड सोप में डेटॉल अथवा लाइफबाय देने को कहा गया है। ठेके की शर्त का उल्लंघन तो हो ही रहा है प्रतिदिन रेलवे को हजारों रुपये का चूना लग रहा है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि जांच करने वाले कोचिंग अधिकारी हर गलती को माफ करते हुए ओके का प्रमाण पत्र दे रहे हैं।  पोर्टेबल हाई प्रेशर जेट मशीन ’ पोर्टेबल सिंगल डिस्क मिनी स्क्रबर ’ पोर्टेबल वेट एंड ड्राइ वैक्यूम क्लीनर ’ हाइड्रेंट टैप्स विथ हाई प्रेशर मशीन ’ हर कोच के लिए अलग-अलग एक-एक सफाईकर्मी ’ हर पिट व हर शिफ्ट के लिए अलग-अलग सुपरवाइजर ’ पूरे प्रोजेक्ट के निरीक्षण के लिए एक प्रोजेक्ट मैनेजर ’ सारे कर्मचारियों के लिए विशेष ड्रेस की व्यवस्थावाशिंग पिट में राजधानी हो या दूसरी ट्रेनें कुछ ऐसे की जाती हैं साफ

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