रतलाम-डूंगरपुर रेल लाइन : पैसाें के लिए सरकार बैंक से लेगी लोन

रतलाम – बजट नहीं मिलने से दो साल से बंद पड़ी दिल्ली-मुंबई रूट को सीधे डूंगरपुर से जोड़ने वाली रतलाम-बांसवाड़ा-डूंगरपुर रेल लाइन का काम फिर शुरू होने की उम्मीद है। राजस्थान सरकार रेलवे के साथ ज्वाइंट वेंचर कर कंपनी बनाएगी। यह कंपनी परियोजना के लिए बैंक से लोन लेगी। इसके लिए बैंक एबिलिटी सर्वे शुरू हो चुका है। रिपोर्ट तैयार होने के बाद बैंक तय करेगी की रेल लाइन परियोजना के लिए कितना लोन दिया जा सकता है। पहले सरकार ने फ्री ऑफ कास्ट में जमीन देने का एग्रीमेंट किया था। 2011-12 में प्रारंभ हुई परियोजना में बांसवाड़ा व डूंगरपुर के साथ रतलाम जिले की सीमा में गुड़भेली, फतेहपुरिया, पाटड़ी सहित सैलाना व शिवगढ़ के कुछ गांवों में ट्रैक बिछाने के लिए बड़े पैमाने पर अर्थ वर्क हुआ। बाद में सरकार ने पैसा देने में असमर्थता जता दी, जिससे रेलवे ने इसे फ्रीज (बंद) कर दिया था।

मुख्यमंत्री ने नहीं की मांग, आदिवासियों के हितों की उपेक्षा

सामाजिक कार्यकर्ता एवं पूर्व सांसद प्रतिनिधि अनिल झालानी ने बताया मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने गत दिनों प्रदेश की रेल परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए रेलमंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात की लेकिन रतलाम-डूंगरपुर रेल लाइन पर कोई बात नहीं की। ऐसा करके मुख्यमंत्री ने रतलाम-झाबुआ अादिवासी क्षेत्र के प्रति उपेक्षा स्पष्ट कर दी है। 2011 में राजस्थान की गेहलोत सरकार ने तेजी से काम किया किंतु वर्तमान भाजपा सरकार ने बंद कर दिया है। इसके शुरू होने से दो ताप विद्युत घर तथा परमाणु संयंत्र सहित व्यापार-व्यवसाय के नए मार्ग खुलेंगे, जिससे आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र का विकास होगा। उन्होंने मुख्यमंत्री से गुजारिश की है कि योजना को तेजी से चालू करने के लिए पुरजोर मांग रखते हुए रेल मंत्रालय को संशोधित ज्ञापन भेजें।

मध्यप्रदेश में अभी 18 करोड़ का मुआवजा बंटना बाकी

रतलाम-डूंगरपुर रेल लाइन में से 49 किमी की लाइन मप्र सीमा है। रेलवे 175.56 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित कर चुका है, 38 करोड़ रुपए मुआवजा बंटना था। राजस्थान सरकार 20 करोड़ दे पाई है, 18 करोड़ का मुआवजा बंटना है। योजना के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर मुकेश मीणा ने बताया सरकार व रेलवे ज्वाइंट वेंचर कर बैंक एबिलिटी सर्वे करा रहा है, जिससे योजना के लिए बैंक लोन लेकर रुपए का इंतजाम किया जाएगा। फिलहाल यह प्रक्रियाधीन हैं।

ये है रेल परियोजना

शुरुआत – 2011-12
पूरा होना था – 2017
शुरुआती लागत – 2082.74 करोड़
अब लागत – 3450 करोड़
स्टेट गर्वमेंट का शेयर – 1725 करोड़
रेलवे शेयर – 1725 करोड़
रेल लाइन – 191 किमी
स्टेशन बनेंगे – 19 ( 4 मप्र की सीमा में)
पुल-पुलियाएं – 150

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