विद्युत टै्रक पर भी जुगाड़ से काम चला रहा है रेलवे

Bahadurgarh (BGZ) बहादुरगढ़:  दिल्ली-रोहतक रेल लाइन का विद्युतीकरण होने के बावजूद भी विभाग की ओर से यहा फाटक पर वर्षो पुरानी व्यवस्था से काम चलाया जा रहा है। जिस क्रासिंग पर कलर लाइट सिग्नल लग चुके है। वहा अब भी लाल झडियों से ट्रेनों को रोकने का संकेत दिया जा रहा है। ये सिग्नल लगे एक साल बीत चुका है लेकिन चालू होने का इतजार अभी तक खत्म नहीं हुआ।

बहादुरगढ़ क्षेत्र में आने वाली बराही रेलवे क्रासिंग पर सिग्नल का मामला काफी पेचीदा है। इस क्रासिंग पर कई हादसे हो चुके है और कई लोगों की जान जा चुकी है। इसके बावजूद रेलवे की नींद नहीं टूट रही। यहा कलर लाइट सिग्नल तो लगा दिए गए, लेकिन एक वर्ष से भी ज्यादा समय बीतने के बाद भी इन्हे चालू नहीं किया जा रहा है।

हालात तो यह है कि इन सिग्नलों की व्यवस्था में इतना समय नहीं लगा, जितना इन्हे चालू करने के इतजार में बीत गया है। स्थानीय अधिकारी भी इस मामले में बेबस बने हुए है। वजह यह है कि सब कुछ उच्च स्तर से होना है। उच्चाधिकारियों की ओर से सिग्नल चालू करने की अनुमति कब मिलेगी। यह दूर की कोड़ी बन गई है।

पहले झडी लगेगी, फिर खुलेगी फाटक :

बराही रेलवे क्रॉसिंग पर हालात यह है कि किसी भी ट्रेन के आने से पहले यहा पर तैनात कर्मी फाटक बंद करने के बाद पहले तो दोनों टै्रक पर डडों के सहारे लगाई जाने वाली लाल झडी हटाएगा, उसके बाद जब ट्रेन गुजरेगी, तब इन झडियों को दोबारा लगाया जाएगा। इसके बाद ही वह फाटक खोलेगा। इससे कई बार तो वाहनों की लाइन लंबी हो जाती है। फिलहाल आसौदा और सापला फाटक पर रेलवे ओवर ब्रिज का निर्माण चल रहा है। ऐसे में ज्यादातर वाहन वाया बराही होकर बहादुरगढ़ पहुचते है। इस स्थिति में फाटक को खोलने में यदि पाच मिनट भी ज्यादा लगते है तो उससे लोग परेशान हो उठते है। बराही निवासी जय सिंह, शमशेर, सतीश, इद्रजीत ने बताया कि कई बार इमरजेंसी के समय भी फाटक ज्यादा देर तक बंद रह जाती है क्योंकि कर्मी को अपना केबिन छोड़कर झडी लगाने आना पड़ता है।

उच्चाधिकारियों की अनुमति से चालू होंगे सिग्नल :

स्थानीय स्टेशन अधीक्षक यशपाल सिंह का कहना है कि उच्चाधिकारियों की अनुमति के बाद ही यहा पर लगाए गए सिग्नल चालू हो पाएंगे।

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