Jamshedpur on Rails – An Exhibition of Steel Express with pictorial depiction of century-old Tata Steel’s journey

Steel Express with pictorial depictions of Tata Steel’s journey over the last 100 years celebrated. This marks the year-long centenary celebration of Jamshedpur’s formation. एक वर्ष तक जमशेदपुर के इतिहास को स्टील एक्सप्रेस बताएगी कि किस तरह जमशेदपुर पल-पल बदलता रहा।

TATA: Decked up with pictorial depictions of Tata Steel’s journey over the last 100 years, the Steel Express chugged off from Tatanagar station for Howrah on Tuesday, marking the year-long centenary celebration of Jamshedpur’s formation.

The Steel Express that runs between Tatanagar and Howrah, will exhibit the legacy, culture and journey milestones under the theme ‘Jamshedpur on Rails’, a Tata Steel official said.

“This is aimed at helping citizens and railway commuters understand and appreciate the role and significance of Jamshedpur city in the larger fabric of India’s history, and its role in nation building,” the official said.

The city, originally a village called Sakchi, was renamed as Jamshedpur by Lord Chelmsford (Viceroy of India between 1916-21) in 1919 in the honour of Jamsetji Nusserwanji Tata, founder of the Tata group. In the same year, the railway station was also rechristened as Tatanagar.

“By connecting two of the most important cities in eastern India, the Steel Express is indeed a lifeline for both citizens and businesses like Tata Steel,” he said.

The train started its maiden journey on April 1, 1970.

“In many ways, this train is an integral part of Jamshedpur. We are delighted to share the story of Jamshedpur through this uniquely branded Steel Express,” the official said.

जमशेदपुर के सौ वर्ष (शताब्दी वर्ष) पूरा होने पर टाटा स्टील ने शहरवासियों को जमशेदपुर के सौ वर्ष के इतिहास का तोहफा दिया है। एक वर्ष तक जमशेदपुर के इतिहास को स्टील एक्सप्रेस बताएगी कि किस तरह जमशेदपुर पल-पल बदलता रहा। इस पूरे इतिहास को स्टील एक्सप्रेस के बाहरी व भीतरी हिस्सों में स्टीकर के माध्यम से दर्शाया गया है। यह बातें चक्रधरपुर मंडल के डीआरएम छत्रसाल सिंह ने कही। उन्होंने कहा कि जिस तरह टाटा स्टील ने इस पहल में दिलचस्पी दिखाई है उसी तरह अन्य औद्योगिक क्षेत्र की कंपनियां भी आगे आये ताकि झारखंड की संस्कृति को भी ट्रेन में स्टीकर के माध्यम से दर्शाया जा सके।

रेलवे की आय में पांच फीसद योगदान टाटा स्टील का

टाटा स्टील टीक्यूएम स्टील बिजनेस प्रेसिडेंट आनंद सेन ने कहा कि रेलवे की आमदनी में सालाना पांच प्रतिशत का योगदान टाटा स्टील का है। उन्होंने कहा कि रेलवे का साथ व सहयोग टाटा स्टील के साथ बना रहे। रेलवे को वार्षिक आय बढ़ाने के विषय में भी सोचना चाहिए। जिस तरह टाटा स्टील ने स्टील एक्सप्रेस में ब्रांडिग की है, ऐसे ही दूसरे ट्रेनों में भी ब्रांडिंग की व्यवस्था रेलवे को करनी चाहिए।

एक नंबर प्लेटफार्म से रवाना हुई ट्रेन

इससे पूर्व जमशेदपुर के शताब्दी वर्ष को लेकर टीक्यूएम स्टील बिजनेस प्रेसिडेंट आनंद सेन, डीआरएम छत्रसाल सिंह, सीनियर डीसीएम मुकेश कुमार पाठक, सीनियर डीओएम भाष्कर, टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट चाणक्य चौधरी, अवनीष गुप्ता ने ने संयुक्त रुप से मंगलवार की सुबह 6.15 बजे  उद्घाटन किया। जिसके बाद ट्रेन की रवानगी टाटानगर स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक से हुई। ट्रेन में खचाखच यात्री सवार थे। उद्घाटन के उपरांत मंच से आनंद सेन व डीआरएम छत्रसाल सिंह ने उपस्थित रेल अधिकारी, टाटा स्टील कर्मचारी व यात्रियों को संबोधित किया। इस मौके पर स्टेशन निदेशक एचके बलमुचू, सीआई एके सिंह, डिप्टी एसएस एसके पति, आरएन मिश्रा, आरपीएफ व जीआरपी के पदाधिकारी उपस्थित थे।

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